Home Hindime जानिए सरकार क्यों बेच रही है सरकारी कंपनियों को और कौन सी...

जानिए सरकार क्यों बेच रही है सरकारी कंपनियों को और कौन सी कंपनियां जा रही हैं बेची :-

46
0
जानिए सरकार क्यों बेच रही

आर्थिक परिदृश्य में होते बदलाव के कारण सरकार public sector unit ( सरकारी कंपनिया ) की कुछ कंपिनयों की हिस्सेदारी निजी हाथों में सौपने जा रही है जिसके कुछ फायदे तो जरूर है लेकिन इसके रोज़गार सम्बन्धी अपने नुकसान भी हैं ।

जानते है वे कौनसी मुख्य बड़ी कंपनीयां है ?

जानिए सरकार क्यों बेच रही


BPCL ( Bharat Petroleum corporation Limited ) :- इस कंपनी को भारत पेट्रोलियम के नाम से भी जाना जाता है और यह देश की दूसरी सबसे बड़ी  सरकारी पेट्रोलियम कंपनी है जिसके पेट्रोल पंप पूरे देश की पेट्रोल आपुर्ति में अहम रोल अदा करते है । इसको लगभग पूरे बेचे जाने की योजना है जिसके पहले हिस्से से 53.3 फ़ीसदी हिस्से को बेचकर 55 से 65000 करोड रुपए जुटाए गए हैं और कुल 1लाख 5 हजार करोड रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। 

BEML (Bahrat Earth Movers Limited ):-     भारतीय सेना के लिए heavy duty vehicles (भारी वाहन) और मेट्रो ट्रेन्स जैसे सुविधाओं की आपूर्ति करने वाली इस कंपनी का 54 फ़ीसदी हिस्सा भारत सरकार 21000 करोड़ में प्राइवेट हाथों में सौंपने जा रही है । 

CONCOR (Container corporation of India limited ) :-  कंटेनर के द्वारा ढुलाई का काम करने वाली कंपनी अर्थात बड़े-बड़े कंटेनर्स के द्वारा माल के आयात व निर्यात को प्रभावित करने वाली इस कंपनी की 54.8 फ़ीसदी हिस्सेदारी को लगभग 20000 करोड में बेचे जाने की आशंका है । 

SCI (Shiping corporation of India ) :-  पानी के बड़े-बड़े जहाजों के द्वारा भारत के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने वाली इस कंपनी को जिसका हेडक्वार्टर मुंबई में है और 3900 करोड का राजस्व पैदा करने वाली इस कंपनी के तहत 73.75 फ़ीसदी शेयर को लगभग 20 हजार करोड़ में बेचे जाने की  योजना है । 

AIR INDIA :- भारत की बड़ी विमानन कंपनी एयर इंडिया को सरकार के द्वारा बेचे जाने की तैयारी भी की गई है मंदी के हालात की वजह से विनिवेश नीति 1991 पर हर सरकार चली है । अब इसको भी privet हाथों में सौपने की तैयारी की जा रही है । जनवरी में intrim डिविडेंट पर इसका फैसला किया जाएगा ।  

क्या सरकार के इन फैसलों के बाद भारत में आर्थिक मंदी (जिसको अब लगभग सभी अर्थशास्त्रियों द्वारा मान लिया गया है और अब तो सरकार भी ऐसा मानने लगी है)से उबरने में सहायता मिलेगी अथवा नहीं ये एक बहस का मुद्दा है । ये भी सत्य है कि पहले लाभ देने वाली इन कंपनियों के राजस्व पैदा करने की शक्ति में कमी आयी है ।

तो, क्या privet sector के रूप में बदल देने पर इनके हालात में सुधार आएगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा , फिलहाल तो विपक्ष और कुछ अर्थशास्त्री इसको उचित नही मानते और कुछ इसके पक्ष में भी हैं । ये कहना गलत नही होगा कि अब सरकार के इन कदमो के द्वारा भारत के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की कोशिस की जा रही है अब ये देश के हित मे होगी या नहीं ये एक बहस का मुद्दा जरूर है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here