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क्या होते है फ़ास्ट ट्रैक Fast Track Court ?

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हाल ही में अपना बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट (fast track court ) में सुनवाई की बात सुनने में आती रहती है तो आइए आज हम जानते हैं कि फास्ट ट्रैक कोर्ट होते क्या है ?    फास्ट ट्रैक कोर्ट  Fast Track court की अवधारणा 11वीं फाइनेंस कमीशन के रिकमेंडेशन के आधार पर बनाई गई जिसमें पूरे देश में 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई सेशन कोर्ट कोर्ट में पड़े लंबित मामलों को जल्दी से निपटाने के लिए इन कोर्ट्स का इस्तेमाल किया जाना था जिसमें अंडर ट्रायल पर जो कि कैदी हैं उनके मामलों को भी निपटाने के लिए ऐसी फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है ।

भारत में बनाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट की अवधि 31 मार्च 2005 को ही समाप्त हो गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इंस्ट्रक्शन पर गवर्नमेंट ने 1542 फास्ट ट्रैक कोर्ट को जारी रखने की अनुमति दी थी इसका मुख्य काम न्यायपालिका को पावरफुल बनाने तथा जल्दी न्याय देने के लिए किया जाना है । एक केस बाबू सिंह वर्सेस स्टेट ऑफ यूपी में जस्टिस कृष्णा अय्यर ने कहा कि हमारी न्यायपालिका गंभीर मामलों में भी काफी स्लो है जल्दी न्याय पाना भारतीय नागरिक का एक फंडामेंटल राइट Fundamental Right है । 

आपराधिक मामलों में अनुचित देरी को रोकने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्टों का प्रयोग किया जाना चाहिए जिसमें प्रिजन कोर्ट एक मुख्य अवयव है , जिसमें की अंडर ट्रायल अर्थात कैदियों की सुनवाई जेल में ही हो सके ऐसे मामले जिनमें 2 साल से कम की सजा का प्रावधान है उसमें प्रिजन कोर्ट का प्रयोग किया जाना चाहिए । लोक अदालत भी फास्ट ट्रैक कोर्ट का एक शानदार उदाहरण है जिसमें छोटे लंबित पड़े मामलों को जल्दी निपटान हेतु लोक अदालत में लाया जाता है तथा उनका निस्तारण वहां किया जाता है ।

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