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जाने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019

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कुछ समय पहले लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 विधेयक को पारित किया जा चुका था और कल 11 दिसंबर 2019 को यह राज्यसभा से भी पास हो गया इसके पक्ष में 117तथा इसके विरुद्ध 92 वोट मिले जिसमें पूर्ण बहुमत से यह बिल पास हो गया । नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में बहुत से लोगों को सबसे तथा उसके बारे में तरह-तरह की अवधारणाएं हैं हम आज विस्तार में जानते हैं की नागरिकता संशोधन विधेयक क्या है और इसमें के नए प्रावधानों को जोड़ा जा रहा है तो आइए पहले इसके इतिहास पर नजर डालते हैं । 

क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 ?


इस नागरिकता विधेयक में अफगानिस्तान (Afganistan) बांग्लादेश(Bangladesh) और पाकिस्तान(Pakistan) के हिंदू सिख जैन बौद्ध पारसी ईसाई समुदाय के प्रवासियों को जो धार्मिक उत्पीड़न आदि के कारण भारत में आए और या या 31 दिसंबर 2014 पहले से भारत में थे उनके वैध दस्तावेजों के आधार पर उनको नागरिकता दी जानी है है, गौरतलब है कि इसमें उन नागरिकों को भी नागरिकता दी जाएगी जिनके दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी है उन सभी को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। इस बिल में इंटर लाइन परमिट वाले और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल उत्तर पूर्व (नॉर्थ ईस्ट, North East) के राज्यों को इससे अलग रखा गया है। 

Citizenship Amendment Bill


इससे पहले ये विधेयक 2016 में भी पेश किया गया था लेकिन तब यह पारित नही हो सका था । फिलहाल भारत में कानून यह था कि भारत पर आने के लिए आप को वैध दस्तावेजों की आवश्यकता थी अगर आपके पास वैध दस्तावेज नहीं है और आप अवैध प्रवासी हैं तो आपको नागरिकता नहीं दी जाएगी

2016 वाले Citizenship Amendment Bill के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार थे ।


1● 1 दिसंबर 2014 से पहले के अवैध प्रवासियों को वैध नागरिक बनने का मौका दिया जाना ।
2● नागरिकता के पुराने कानून में प्रावधान का की नागरिकता के लिए आपको आवेदन करने से पहले 11 वर्ष भारत में रहते हुए समय बीत गया हो ,उस समय सीमा को अब घटाकर 6 वर्ष किया जा रहा है, अर्थात अब 6 साल भारत मे रहने के बाद ही आप भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन दे सकते हैं । 
3● अन्य देशों में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिक जिनके पास भारत की आधिकारिक रूप से नागरिकता नहीं है उन्हें ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई,OCI) का दर्जा दिया जाता है ऐसे लोगों के लिए लॉन्ग टर्म के लिए वीजा दिया जाता है अगर वह  नागरिक भारत में किसी कानून का उल्लंघन करते हैं तो उनका ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया का दर्जा समाप्त किया जाएगा ।

अब 2019 में प्रस्तुत इस नागरिकता संशोधन विधेयक में कुछ और संसोधन किये गए है जोकि इस प्रकार है

1◆ सेंट्रल लाइन परमिट वाले राज्य और भारत की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले उत्तर-पूर्व (जैसे असम मणिपुर मेघालय आदि) के राज्यों में यह बिल लागू नहीं होगा
2◆ आपसे ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (Overseas citizen of india) का दर्जा कानून तोड़ने की स्थिति में छीना जाता था और अब ऐसे कानूनों की अलग सूची बनाई जाएगी जिनका उल्लंघन करने पर आपसे यह दर्जा छीना आ जा सकता है । 

सरकार के अनुसार इससे क्या लाभ होगा (Benefits of citizen amendment bill )

पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू सिख बौद्ध जैन पारसी और ईसाई समुदाय वालों लोगों को यह लाभ दिया जा रहा है गौरतलब है कि इन सभी देशों में मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक हैं अतः सरकार का मानना है कि उनको इस लाभ की आवश्यकता नहीं है ।  ये धार्मिक या किसी अन्य आधार पर प्रताड़ित  नहीं हो सकते इसलिए यह बिल केवल अल्पसंख्यकों के लिए लाया जा रहा है जो कि उपरोक्त देशों में रहते हैं । 

क्या सवाल उठाए जा रहे हैं (Questions that arised) -Citizenship Amendment Bill

जहां एक तरफ सरकार के समर्थन वाले लोग इस बिल का पुरजोर समर्थन कर रहे हैं वहीं इस बिल के विपक्ष में रहने वालों की संख्या में भी कमी नहीं है इसलिए यह बिल काफी विवादास्पद माना जा रहा है विपक्ष का कहना है कि जब भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य (Secular state) है तो इसमें मुस्लिम लोगों को क्यों शामिल नहीं किया जा रहा है अर्थात धर्म के आधार पर नागरिकता देने वाला प्रावधान हमारे संविधान के कुल अनुच्छेदों का विरोध करता है । और यह भी कहना है कि केवल पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान की भारत के पड़ोसी देश नहीं है क्या भूटान नेपाल म्यांमार और श्रीलंका आदि पड़ोसी देशों में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को भारत की नागरिकता का प्रस्ताव इस विधेयक द्वारा क्यों नहीं दिया जा रहा है । 

देश पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है यह तो इस विधेयक के लागू हो जाने पर ही पता लगेगा राष्ट्रपति के अंतिम हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून का रूप प्राप्त कर लेगा । इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद सरकार अपना प्रारूप स्पष्ट करेगी कि पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय हिंदू सिख बौद्ध जैन पारसी और ईसाई लोगों को किस प्रकार की प्रक्रिया के बाद भारत की नागरिकता दी जाएगी ।

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